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नीति / शीतल प्रसाद शर्मा

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बिन मांगे पानी देथे, बादर के सुभाव
फोकट म दूसर बर, संत खाथे घाव
रौंद रौंद के माटी दिया बनावय कुम्हार
तभो ले दिया भट्ठी म चढ़ते त होथे दिया तियार
चन्दा सुरज घलो समय म हे बंधाय
समय सबले बलवान, हरिश्चंद्र ल डोम बनाय