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नूनू रे चेतोॅ / नंदनंदन

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नूनू रे चेतोॅ, आबू रे चेतोॅ,
चेतै के दिन छौं, आभियौं तेॅ चेतोॅ ।
बापोॅ कमाय पर बेटा इतराय छै,
काॅलेजोॅ-नामोॅ पर रोज फिलिम जाय छै,
हवा में हिलै छै, लागै छै भरभौ,
अभियें ई हाल छौं, आगू की करभौ ?
फूंकै छै कैप्सटन, चिबाबै छै पान,
सड़लोॅ जुआनी पर एतना गुमान ?
चेहरा छौं बासी, माथा में गोस्सा,
बात-बात में तानै छै दोसरा पर घुस्सा,
सूटे-बूट पिन्हला संे आदमी कहाबै छै ?
गुनिये केॅ पूछै छै, गुन लोगें गावै छै !
गुरु जें ज्ञान देलखौं, हुनखैं से झगड़ा ?
अन्त नै ओर नै, बेबातोॅ के रगड़ा !
बोली छौं ढोल जकाँ गमकै छौं खाल,
हो बाबू की देखी एतना बेहाल !
फिल्मी स्टाइल में गाबै छोॅ गीत,
कखन्हौं तेॅ जोड़ोॅ किताबोॅ सें प्रीत !
हीरा-मोती फेंकी केॅ कौड़ी सम्हालै छोॅ,
बनी केॅ उतपाती घरे उजाड़ै छोॅ,
जे लेली ऐलोॅ छोॅ ओकरा चमकाबोॅ,
आशा छौं तोरा पर ई नै भुलाबोॅ,
तेजोॅ सें चमकाबोॅ करथौं सभैं नाज,
तोर्है पर निर्भर छै आगू समाज !
परीक्षा के दिन ऐल्हौं अभियों तेॅ चेतोॅ,
रे नूनू चेतोॅ, रे सुग्गा चेतोॅ !