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न्यूयार्क के लिए एक क़ब्र-3 / अदोनिस

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चूर हो, अरी, स्वतन्त्रता की प्रतिमाओ, गुलाब की बुद्धिमत्ता की
नक़ल करने वाली बुद्धिमत्ता के साथ ओ, सीनों में गड़ी कीलो ।
हवा एक दफ़ा फिर से बह रही है पूर्व से, उखाड़ती हुई तम्बुओं
और गगनचुम्बी भवनों को । और दो डैने हैं उकेरते हुए :
पश्चिम के भूगोल में उभरती है
एक दूसरी वर्णमाला,
और येरुशलम के उद्यान में
सूर्य है एक पेड़ की बेटी ।
इस तरह में दहकाता हूँ अपनी लपटों को । मैं बिलकुल शुरू से
शुरू करता हूँ, व्यवस्थाएं बनाता
और उन्हें परिभाषित करता :

न्यूयॉर्क
भूसे से बनी एक औरत, और पलंग हिचकोले खा रहा है एक खोखल से दूसरे में
और छत सड़ने लगी है यहाँ :
हरेक शब्द संकेत है पतन का ; एक-एक हरक़त
या तो कुल्हाड़ी है या फावड़ा. और दाएँ और बाएँ शरीर हैं
जो बदलना चाहती हैं प्रेम, दृष्टि, श्रवण, गन्ध और स्पर्श
और यहाँ तक कि ख़ुद बदलाव को -– समय को किसी द्वार की तरह खोलते हुए जिसे उन्होंने तोड़ा है
और बचे हुए समय से काम चलाते हुए ।

सैक्स, कविता, नैतिकता, प्यास, अभिव्यक्ति, ख़ामोशी
और सभी ज़ंजीरों को को नकार कर. मैंने कहा : मैं बेरूत को ललचाऊँगा,
-- कुछ काम तलाशो । दूसरे लोग कहते हैं, शब्द मर चुका है ।
शब्द मर गया क्योंकि तुम्हारी ज़ुबानों ने बोलने की आदत
छोड़ दी बुदबुदाने की आदत के लिए ।
शब्द ? तुम चाहते हो उसकी आग को उद्घाटित करना ? तब, लिखो. मैं कहता हूँ : लिखो ।
मैं नहीं कहता : बुद्बुदाओ । न मैं कहता हूँ : नक़ल करो । लिखो ।
खाड़ी से समुद्र तक मुझे नहीं सुनाई देती कोई ज़ुबान, मैं नहीं पढ़ पाता कोई शब्द । मुझे
शोर सुनाई देता है । यही वजह है मुझे कोई नहीं दीखता आग फेंकता हुआ ।
सबसे हल्की चीज़ होती है शब्द ; तब भी वह लिए चलता है सारी चीज़ें ।
हरक़त एक दिशा और एक क्षण होती है, लेकिन शब्द सारी दिशाएँ और
सारा समय होता है । शब्द -– हाथ, हाथ -– सपना :
मैं तुम्हें खोजता हूँ, ओ आग,
तुम मेरी राजधानी,
मैं तुम्हें खोजता हूँ, ओ कविता ।

और मैं ललचाता हूँ बेरूत को । वह मुझे पहनता है और मैं उसे । हम भटकते हैं किसी
किरण की तरह, पूछते हुए : कौन पढ़ रहा है ? कौन देख रहा है ? सारे
प्रेत हैं दायान के लिए, और तेल बहता जाता है अपने गन्तव्य तक ।
खरा है ईश्वर, और माओ गलत नहीं थे : किसी भी युद्ध में हथियार होते हैं
सब से ज़रूरी कारक लेकिन निर्णायक नहीं । हथियार नहीं,
आदमी होता है निर्णायक कारक ; न कोई जीत अन्तिम होती है न हार ।
जैसे कोई भी अरब करता है, ये कहावतें और सूक्तियां मैंने दुहराईं
वॉल-स्ट्रीट में जहाँ हर रंग के सोने की नदियाँ
अपने स्रोतों से बहती आती हैं । उनके बीच मैंने देखा अरब की नदियों को
जो अपने साथ ला रही थीं करोड़ों कटे हुए अंग
जैसे देव स्वामी को बलि में चढ़ाए गए हों । और हर दूसरी बलि के बीच
क्रिसलर बिल्डिंग से बाहर निकलते अपने स्रोतों को लौटते
नाविक बकबक कर रहे थे ।

इस तरह दहकाया मैंने अपनी लपटों को ।
हम निवास करते हैं काले गुस्से के भीतर
ताकि हमारे फेफड़ों में भर जाए
इतिहास की हवा ।
बाड़ वाले क़ब्रिस्तानों की जैसी काली आँखों में जागते हैं हम
ताकि ग्रहण को पराजित कर सकें ।
हम यात्रा करते हैं काले सिरों के साथ ताकि
नज़दीक आ रहे सूरज से
पहले प्रयाण कर सकें ।