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पदचापें / कंस्तांतिन कवाफ़ी

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मूँगे के उकाब
आबनूसी शैया की शोभा बढ़ाते हुए

सोया पड़ा है जहाँ नीरो[1] गहन निद्रा में —
कठोर, आत्मतुष्ट, शान्तचित्त
शारीरिक बल से भरपूर
ओज और तेज से प्रभाषित

किन्तु वहाँ सेलखड़ी हाल में,
जहाँ है प्राचीन ईनोबारबी देवस्थली[2]
कौटुम्बिक देवता कितने अशान्त !
काँपते हुए थर-थर वे छुटभैये देवता
प्रयासरत छिपाने को अपनी तुच्छ काया ।

सुनी है उन्होंने एक डरावनी आवाज़
सिड्ढियों से होकर ऊपर आती हुई
फौलादी पदचापें ज़ीने को कँपाती हुई :

और भय-विजड़ित अभागे लारेगण[3]
अफरातफरी में, देवस्थली के पीछे
धकियाते-लड़खड़ाते हुए परस्पर —
एक दूसरे पर ढेर होते हुए,

उन्हें पता है,
क्योंकि, उस आवाज़ का रहस्य —
पहचान रहे हैं चण्डीदेवियों[4] की पदचापें ।

[1909]

अँग्रेज़ी से अनुवाद : सुरेश सलिल

शब्दार्थ
  1. नीरो [37-68 ई०] : दोमितिअस ईनोबारबुस और अग्रीपिना जूनियर का बेटा। अग्रीपिना ने बाद में सम्राट क्लाउदिअस से विवाह किया। फिर उसे विष देकर नीरो को राजसिंहासन पर बैठाया।
  2. रोम में प्रत्येक सम्भ्रान्त परिवार में पूर्वजों के नाम पर एक छोटी देवस्थली होती थी — रसोईघर में भट्ठी या चूल्हे के पास। उनमें कौटुम्बिक कल्याण के लिए छोटे-छोटे देवता होते थे, जिन्हें ‘लारे’ और उनके आवास को ‘लारेरिअम’ कहा जाता था ।
  3. रोम में प्रत्येक सम्भ्रान्त परिवार में पूर्वजों के नाम पर एक छोटी देवस्थली होती थी — रसोईघर में भट्ठी या चूल्हे के पास। उनमें कौटुम्बिक कल्याण के लिए छोटे-छोटे देवता होते थे, जिन्हें ‘लारे’ और उनके आवास को ‘लारेरिअम’ कहा जाता था ।
  4. रोमन पौराणिकी में ‘फ़्यूरी’ नाम से प्रतिशोध की चण्डीरूपा देवियों का उल्लेख है। उनके सिर पर, केशों के बजाय, साँप साँपिनियाँ लटों की भाँति लटकते थे। वे चण्डीदेवियाँ, मातृघात के जघन्य अपराध का दण्ड देने के लिए नीरो को खोज रही थीं ।