भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

पद / 2 / राजरानी देवी

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

सिय-मुख चंद त्याग दूजो चन्द मंद कहाँ,
कौन कुण जानि समता में अवलोकों में।
मुख अकलंकी सकलंकी तू प्रसिद्ध जग,
कहि समझाऊँ कैसे वाको जाय रोकों मैं॥
दिवा द्यति-होन घन समय मलीन-खीन,
‘राम प्रिया’ जानै तोहिं जन सब लोकांे मैं।
लली-मुख लालिमा गुलाल सों लखात जैसे,
तैसी दरसावो तो सराहौं तब तोकों मैं॥