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परैइयों / कनक लाल चौधरी ‘कणीक’

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आवेॅ ईन ठां सेॅ मोॅन
उचटी गेलै हमरोॅ
लागै छै कि कखनी हम्में
भागी के परैइयों
होना केॅ तेॅ सगरो ठियाँ एक्के हाल होतै
नेपालोॅ पहुंचला पर कपार होतै साथें
चल्लोॅ जइयोॅ काशी आकि पुरी तिरूपति हम्में
सभ्भै ठियाँ कम्मा देतै यही गोड़ें-हाथें
आपनोॅ बनाय लेॅ पड़तै, वहाँ केरोॅ लोगवा केॅ
जेना यहाँ सबकेॅ हम्में, आपनोॅ बनैलियै
फेनू वहाँ यही हाल बीतला पेॅ होतै
जेना यहाँ रहै के ईनाम हम्में पैलियै
सीजरोॅ के रूतवा सभ्भैं मिली देलकै
ब्रूटसोॅ के चेहरा लै-लै टहलोॅ करलकै
आगू-पीछू लागी-लागी खुब्बे भरमैलकै
मौका मिलथैं उल्टे पीठीं छुरिया भोंकलकै

आपनोॅ कहावै बाला
कोय नैं यहाँ रहलै
लागै छै कि जग्घोॅ छोड़ी
कखनी निकली जैइयों

जबेॅ यहाँ अैलोॅ छेलियै बात तखनी आरो रहै
जौने यहाँ लानी लेलकै खुद्दे नहीं रहलै
सगरो ठियाँ ओकरे तूती बोलै छेलै तखनी
कोइयो ओकरा आगू रूतबा में नैं ठहरलै
ओकरा अछैतें कोइयो औंगरी नै उठावै
कोइयो तखनी हमरोॅ आगू खोखेॅ नैं सकलकै
घरा-घरी वहीं ने चिन्हैलेॅ गेलै हमरा
के छेकै चोर? आरो साध सब बतैलकै
जेकरा चिन्हैने छेलै चोरनी के बेटबा
वहीं आय हमरोॅ नीनान करी देलकै
बप्पा कोइयो आरो छेलै मइया रखैल रहै
चोरबा के साथैं जें जबानी काटी लेलकै

चोरी के अनजवा सें
पोसी लेलकै बेटवा जें
वही बेटवा गरजै-घोकै
कखनी भगैइयों

नैं तेॅ कोइयो भोट देलकै नै कोइयो एलेक्सन लड़लै
सौंसे ठो मोहल्ला केरोॅ मेंठ बनी गेलै
जन्नेॅ-जन्नेॅ झगड़ा देखै-जन्नेॅ-जन्नेॅ रगड़ा देखै
बिन बोलैने तन्नेॅ-तन्नेॅ पहुंची वांही गेलै
आपनोॅ औकाती के एहसास देखाबै लेली
बिन मतलब के वें नें बड़का मंजमा धरलकै
गारी कोइयो आरो देलकै बातोॅ कुछु आरो रहै
आपनोॅ भड़ास आबी हमर्है पर उझलकै
हरिणोॅ गवाही लेली सुअरो जुटैलकै
जौने हीत-मीत कही नाता-रिस्ता जोड़ै
ओकर्है हुंकारी पर वें मुड़िया डोलावै
आपनोॅ जानतें वेभरमी के कोय जतन नैं छोड़ै

जन्ने-जन्ने अँखवा घूमै
सभ्भै के खिलाफे पैइयै
लागेॅ लागलै कखनी चीजवा
छोड़ी के परैइयों

नाता छुच्छोॅ एक्के टा सहोदर नें निभावै छै
मैंहना पनरैहाँ सुधि लै लेॅ पहुंची आवै छै
कखनू चूड़ा, कखनू चौॅर कखनू आरो चीज लेने
दवैइया कीनै बहाना पहुंची यहाँ जाबै छै
बेटी तेॅ पराई होली, तइयो हुलूक-बुलूक करै
एक्के टा सम्मादोॅ पर हौ दौड़ली चल्ली आबै छै
आपनोॅ जानतें ओकरा सें जत्तेॅ भी बनेॅ पारै छै
आपन्हैं ठियाँ राखै खातिर हरदम्में बोलाबै छै
फेनू जबेॅ सोचै छियै भोगै छी कथी के दण्ड?
पिछला जनमोॅ रोॅ पापोॅ सें पार कबेॅ पैबै?
आबेॅ जों कमैइया खैबै बेटी औॅ जमैइया केरोॅ
कत्तॅे जनमोॅ तालुक ओकरा गिनी केॅ सधैइबै

बेटबा केॅ तेॅ फुरसत नैं छै
बचलां की मरलां
सोचै छियै याँही रही
पापोॅ के सधैइयों