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पर ऊ दिल के हकी बड़ी भोली / सिलसिला / रणजीत दुधु

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बड़ी कड़वा हे उनकर बोली
पर उ दिल के हकी बड़ी भोली।

मुँह पर कह देथुन साफ साफ
गलतियों करबा तऽ कर देथुन माँफ
बरदास न´ उ करथुन ठिठोली
पर उ दिल के हकी बड़ी भोली।

सच बोलवा तब मिलतो हलुवा
झूठ पकड़इला पर पिलुअहवा
दगा जड़तो गारी के गोली
पर उ दिल के हकी बड़ी भोली।

दारू पी के गिरबा नाली
न´ समझथुन ऊ जीजा-साली
बेरंग रह जयतो तोहर होली
पर उ दिल के हकी बड़ी भोली।

सतो न´ कइलक इन कइफट्टा
कम से कम पी लेत हल मुट्ठा
हमरा नियन न´ मिलतउ हमजोली
पर उ दिल के हकी बड़ी भोली।

शुरू हो जा हकी ऊ अनगुते
पियार से उठवथ लाते-मुक्के
ई न´ की उठ मुँह कान घोली
पर उ दिल के हकी बड़ी भोली।

मेहरारू होत एक्के-दुक्के
कुछ नय कइलो पर न´ ऊ भुक्के
जिनगी में न´ बनइलूँ खोली
पर उ दिल के हकी बड़ी भोली।

भुइयें बिछउना भुइयें खटिया
उनके बाँह हमरा ले तकिया
एक्के नियन दीवाली होली
पर उ दिल के हकी बड़ी भोली।

कतना उनका हमरा से नेह
एक्के साड़ी से झाँपथ देह
कहियो न´ नाया देलुँ चोली
पर उ दिल के हकी बड़ी भोली।

कहियो न´ कहऽ हकी तो घट्ठल
हमरा खिलावऽ हकी रह भुक्खल
अड़ोस-पड़ोस कहे ओकरा बकलोली
पर उ दिल के हकी बड़ी भोली।

काम से हमरा मिलल हे छुट्टी
भइंस के खिलवथ काट के कुटीर
घसगढ़नी के बनइलकी टोली
पर उ दिल के हकी बड़ी भोली।