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पळपाळट करती रोसणी री चोट देखो / सांवर दइया

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पळपाळट करती रोसणी री चोट देखो
चूंधा हुया लोग : खुलै कोनी होट देखो

डुसका भर मां री छाती रै चिपगी छोरी
हाथां में लियां थोड़ा-घणा ऐ नोट देखो

चाम-चासणी में डूबी है आ मन-माखी
ऊसी-बूसी लागै नुंवी अबोट देखो

भोर-सिंझ्या-रात सूवै साव नागी तडंग
कामी सूरज रै मनां जागै खोट देखो

तपतै धोरां खातर कुण छोड़ै आ बोलो
ऐ मखमली ढोलिया : गळागच रोट देखो