भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

पहचान / सूर्यदेव सिबोरत

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

कुछ
समझ न पाया
तेरे चेहरे की
वर्णमाला को ।

या तो
मैं पढ़ न सका
या मैंने
पढ़ना नहीं जाना
या
पढ़कर भी
समझा नहीं कुछ
या मैंने
पढ़ा ही नहीं … शायद

क्योंकि
हर बार
उस पर
एक नया अक्षर होता
और
एक नया व्याकरण ।