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पहलम तै मनै जाण नही थी तनै यो के अटखेल किया / मेहर सिंह

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वार्ता- सावित्री जब अपने घर वालों को बताती है कि मैंने तो सत्यवान को अपना जीवन साथी चुन लिया है तो उसकी मां सावित्री को क्या कहती है-

हे डूब कै मरज्या तनै कंगले तैं मेल किया
पहलम तैं मनै जाण नहीं थी तनै यो के अटखेल किया।

जबतैं बात सुणी तेरी ना देही में बाकी थी
इस में म्हारा दोष नहीं खुद तेरी नालाकी थी
ईब तलक हाथां पै राखी थी क्यूं जिन्दगी का झेल किया।

बखत पड़े पै माणस हो सै अप अपणे दा का
बेरा ना यो कद दर्द मिटैगा इस गपती घा का
तूं धृत दताया सर्राह गा कर शामिल क्यूं तेल किया।

जैसे जल बिन बरवा सूकै तूं भी इस तरियां सूकैगी
कड़वी बात सुण सुण कै माया या जिन्दगी भर दूखैगी
हमने या दुनिया के थूकैगी, यो नंग तेरी गैल किया।

मेहर सिंह कर भजन हरि का फेर दुनियां तै जाईये
दो रोटी का काम करे जा और तनै के चाहिए
गुरु लखमीचन्द तूं साच बताईये, यो छोरा क्यूं फेल किया।