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पहली पायदान / कंस्तांतिन कवाफ़ी

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युवाकवि एवमिनस[1] ने एक दिन
थियोक्रटस[2] से जाकर अपना दुखड़ा रोया :

‘क़लम घिसते दो साल हो गये मुझे
और अब तक मात्र एक काव्य-वृत्तान्त मैं रच पाया ।
यही अकेला काव्य मेरा सम्पूर्ण औतित्व है ।

उदास नज़रों मैं देख रहा हूँ कि
कविता की सीढ़ी ऊँची बहुत है, बहुत ही ऊँची,
और उसकी पहली पायदान से, जहाँ अभी मैं खड़ा हूँ,
ऊपर कभी मैं चढ़ नहीं पाऊँगा ।’

गुस्से से भभक उठा थियोक्रटस :
‘ऐसी बात बोलना उचित नहीं ! निन्दनीय है यह !!
पहली पायदान पर होना भी
तुम्हारे लिए प्रसन्नता और गर्व का कारण बनना चाहिए ।

इस पड़ाव तक पहुँचना भी छोटी उपलब्धि नहीं,
तुम्हारा अब तक का औतित्व एक चमत्कार है ।

यह पहली पायदान भी
दुनियादारी से परे
एक लम्बी यात्रा की पहचान है ।

इस पायदान पर खड़े होकर तुम साधिकार
भावनालोक के वासी होने का दावा कर सकते हो ।
और इस लोक के नागरिकों की सूची में
कोई नया नाम दर्ज़ होना
दुष्कर और दुर्लभ की श्रेणी में आता है ।

भरे पड़े हैं विधायक इसकी परिषदों में
कोई धूर्त उन्हें मूर्ख नहीं बना सकता।
इस पड़ाव तक आ पहुँचना मामूली उपलब्धि नहीं ।
तुम्हारा अब तक का औतित्व एक चमत्कार है ।’

[1899]

अँग्रेज़ी से अनुवाद : सुरेश सलिल

शब्दार्थ
  1. इस नाम के किसी कवि का कोई उल्लेख यूनानी कविता के इतिहास में अथवा अन्यत्र नहीं मिलता। यह चरित्र और वृत्तान्त कवि की कल्पना प्रतीत होते हैं।
  2. 310 से 260 ई०पू० के मध्य यूनान का एक प्रसिद्ध प्राचीन कवि, जो वृत्तान्तपरक कविता के लिए जाना गया। इसका जन्म सिसली में हुआ और जीवन का कुछ भाग सिकन्दरिया में बीता।