भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार
Roman

पांव तले जमीं औ’ सिर पर आकाश चाहिए / सांवर दइया

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

पांव तले जमीं औ’ सिर पर आकाश चाहिए।
जीने के लिए आदमी को विश्वास चाहिए।

बारहों महीने पतझड़ से निभ नहीं सकती,
घड़ी भर के लिए ही सही, मधुमास चाहिए।

अंतहीन अंधेरे पथ पर चल पड़ेंगे, सुनो-
मगर इस सांस के साथ कोई सांस चाहिए।

जहां धूल बुहार बैठें, वहीं बसा लें बस्ती,
अपने आस-पास कुछ पानी, कुछ घास चाहिए।

अकेले वर्तमान से भविष्य बन नहीं सकता,
भूलों से सीखने के लिए इतिहास चाहिए।