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पासा उलआ है सुना हमने यूरोप माँहि / नाथ कवि

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पासा उलआ है सुना हमने यूरोप माँहि।
मित्रन की जीत सुन मन हर्षाये हैं॥
हाहाकार चारों ओर भारत में फैल रह्यौ।
ढाई सेर नाज एक रुपया में लाये हैं॥
देश की बिपत्ति के सुनइया मुंदे जेल बीच।
ताहुपै स्वतंत्रता न हासिल कर पाये हैं॥
दीनबन्धु दीनानाथ अरज ये हमारी सुनौ।
कठिन कन्ट्रोल कर भारत पर छोय हैं॥