भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

पुराने मंदिर में शाम / शीन काफ़ निज़ाम

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

अब तो वहाँ
निशान है
जहाँ
कभी देवता की मूर्ति रही होगी
शिकस्ता शहतीर में
फंसा
बचा
ज़ंजीर का हल्का
जिस में
शायद कभी घंटी लटकती हो
सहन में राख है
किसी ने अलाव जलाया होगा
रोशनी और गर्मी के लिए
दरकती दहलीज़ पर
रेवड़ से बिछड़ी
भेड़
पुराने सिज्दे चुनती है
पीले पायदानों पर
नकूशे-पा उभरते हैं