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पृथ्वी का रक्तवाहिका-तन्त्र / ईगर सीद / अनिल जनविजय

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सागर, नदियाँ, झीलें और तालाब
हैं पृथ्वी का रक्तवाहिका तन्त्र
इनमें से हर चीज़ का अलग महत्व है
अलग है ज़िम्मेदारी पृथ्वी की हर रक्तवाहिका की ।

हमारे इस ब्रह्माण्ड की
सबसे बड़ी नदी है अमेज़न
पृथ्वी का सबसे ज़्यादा रक्त यानी मीठा पानी
दक्षिणी अमेरिका की इसी नदी में है।
यह नदी अक्सीर का काम करती है
पृथ्वी पर जीवन के लिए
इस नदी-घाटी के इलाके में फैले विशाल जंगल
अमेज़न वन कहलाते हैं,
जिन्हें पृथ्वी के फेफड़े माना जाता है।

पृथ्वी की आज की पर्यावरण दूषण की स्थिति में
भारी दबाव है पृथ्वी के फेफड़ों पर।

कुछ ऐसा हो गया है कि
पृथ्वी की रक्तवाहिकाओं की गति धीमी हो गई है
ऐसी ही एक नदी है रूस में जिसे अमूर कहा जाता है
लेकिन अमेज़न के जंगलों में
अमूर नदी को नहीं खोजा जा सकता है
उनमें तो घुली हुई है अमेज़न नदी ।

पृथ्वी की रक्तवाहिकाओं पर
दबाव बढ़ता जा रहा है
ऐसी स्थिति में मैं एक सपना देखता हूँ
फैल रहा है मेरा सपना तूफ़ान की तरह
चारों दिशाओं में
सपना नहीं है यह,
भावनाओं के गहरे तालाब और झीलें हैं
बचाना है हमें अपनी पृथ्वी की रक्तवाहिकाओं को
बचाना है उसके फेफड़ों को ।

पर पृथ्वी पर मनुष्य
एक गहरी तन्द्रा में है
यह एक ऐसी नींद है, जिससे बचना असम्भव है
मनुष्य की खोपड़ी सो रही है
अपने बदसूरत चेहरे के साथ

हो सकता है यह मेरी अभिव्यक्ति की ग़लती है
जो विद्वानों और पृथ्वी के गायकों के ख़ून में मिल गई है ।
लेकिन मेरा मानना है कि जब तक
पृथ्वी की रक्तवाहिकाओं में बह रहा है स्वच्छ रक्त
जब तक अमेज़न और अमूर नदियाँ जीवित हैं
पृथ्वी पर रहने वाले
सात अरब लोगों का
जीवन सुरक्षित रहेगा
उन्हें मिलता रहेगा प्रेम ।

मूल रूसी से अनुवाद : अनिल जनविजय