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पॉल रॉब्सन के नाम / पाब्लो नेरूदा

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एक बार
वह नहीं था
पर उसकी आवाज़ थी
प्रतीक्षा करती हुई

अन्धेरे से हुई अलग रोशनी
रात से अलग हुआ दिन
और धरती आदिम जल से

और
पॉल रॉब्सन की आवाज़
चुप्पी से अलग हुई थी

हमें जकड़ने के लिए
जब बढ़ रहा था अन्धेरा
धरती के भीतर बढ़ रही थीं जड़ें
अन्धे पेड़ लटक रहे थे
रोशनी के लिए
सूरज थर्रा उठा था
जल गूँगा हो गया था
और जानवर
धीरे-धीरे बदल रहे थे अपना आकार
धीरे-धीरे बना रहे थे स्वयँ को वे
जल और वायु के अनुकूल

तभी से
तुम हमेशा आवाज़ रहे मनुष्य की
आकार लेती धरती का गीत रहे
प्रकृति की गति रहे और नदी का सँगीत रहे

तुम्हारे दिल पर
झरनों ने फेंकी
अपनी अन्तहीन गड़गड़ाहट
जैसे किसी चट्टान पर गिरी कोई नदी
और चट्टान गा उठी
सब मूक लोगों की सँगठित आवाज़ में

तुम्हारी आवाज़ ने
रोशनी दिखाई
सब चीज़ों, सब लोगों के रक्त को
और धरती व आकाश
अग्नि औ’ अन्धेरा औ’ पानी
जाग उठे सब तुम्हारे गीतों से

पर बाद में
फिर अन्धेरा छा गया आकाश पर
निकली हरी लपट
भय, युद्ध, पीड़ा और कष्टों से
अग्नि गुलाब की

छा गई भयानक धूल
नगरों के ऊपर
राख बधित लोगों की
जो भट्टियों में चले गए
अपने माथे पर नम्बर चिपकाए
केश रहित
स्त्री-पुरुष, जवान औ’ बूढ़े
इकट्ठे हुए
पोलैण्ड, उक्रअईना, अम्सटर्डम और प्राग में

दोबारा
उदास हो गए नगर
और छा गई ख़ामोशी विशाल
एक जीवित हृदय पर
गुम्बद के पत्थर की तरह सख़्त
निर्जीव हाथ छा जाए जैसे
बच्चे की आवाज़ पर

तब
पॉल रॉब्सन
तुमने गाए गीत
और पुनः इस धरती पर
सुनी गई
अग्निशमन के रूप में
जल की वह प्रभावशाली आवाज़

हमें याद करा रही थी
शानदार, शान्त, अनगढ़ और निश्छल
धरती की आवाज़
कि हम अब भी आदमी हैं
बाँटते हैं आपस में
आशाएँ और दुख अपने

तुम्हारी आवाज़
अलग कर रही थी हमें
अपराध से
एक बार फिर रोशनी
अलग हुई थी अन्धेरे से

अबकी बार
गिरी उदासी
हिरोशिमा पर
भरपूर ख़ामोशी
शेष नहीं बचा कुछ भी
नहीं बची एक भी चिड़िया
ख़ाली किसी खिड़की पर गा सके जो
बिलखते अपने बच्चे के साथ
नहीं बची एक भी माँ
एक भी कारख़ाने का कोलाहल नहीं रहा
शेष नहीं रही मरती वायलिन की चीख़
कुछ भी तो नहीं रहा
आकाश से गिरी मौत की ख़ामोशी जब

और फिर
मनुष्य की आवाज़ के
पुनरुत्थान के लिए
गहरे कहीं गूँजती आशाओं के लिए
पिता औ’ भाई पॉल
तुमने गाए गीत

फिर
तुम्हारे हृदय की नदी
चौड़ी और गहरी थी अधिक
उस ख़ामोशी से

यह सराहना कम होगी
यदि कहूँ तुम्हें मैं बादशाह
सिर्फ़ नीग्रो आवाज़ का
सिर्फ़ अपनी जाति में कहूँ तुम्हें महान
अपने सँगीत की ख़ूबसूरत धुनों के बीच
यद्यपि तुमने गाए गीत
केवल उन काले बच्चों के बारे में
जिन्हें हथकड़ी पहनाई थी
उनके क्रूर मालिकों ने

नहीं,
पॉल रॉब्सन
तुम गाते थे लिंकन के साथ
न केवल काले लोगों के लिए
न केवल दीन-हीन नीग्रो लोगों के लिए
तुम गाते थे
ग़रीबों के लिए
गोरे लोगों के लिए
आदिवासियों के लिए भी
सब लोगों के लिए
तुमने घेरा आकाश अपनी पवित्र आवाज़ से

ख़ामोश नहीं रहे तुम
पॉल रॉब्सन
फेंक दिया गया था जब
गली में
पैड्रो और जुआन को
सब साज-ओ-सामान के साथ
बरसती बारिश में

या जब
चिली में
उपजा गेहूँ
ज्वालामुखी की भूमि पर
और अग्नि में भस्म हुई
सतयुगी धर्मान्धता
शिकारी था उत्तेजित और अविश्वासी
तब तुम रुके नहीं, गाते रहे सदा ही

आदमी
जब भी गिरा
तुमने
उसे ऊपर उठाया
बने तुम नदी कभी भूमिगत
औ’ कभी तुमने भेदा
गहन अन्धेरे में झलकते प्रकाश को

तुम
मरते हुए सम्मान की
अन्तिम तलवार थे
ज़ख़्मी प्रकाश के अन्तिम काँटे थे तुम
सदा बनी रहने वाली गड़गड़ाहट थे

तुम पॉल रॉब्सन
रक्षक थे आदमी की रोटी के
सम्मान थे
सँघर्ष थे
आशा थे
प्रकाश थे मनुष्य के लिए
सूरज के बेटे तुम
हमारे लिए सूरज थे
अमरीकी उपनगरों के सूरज तुम
सूरज थे एण्डेस की लाल बर्फ़ के
तुम हमारी रोशनी के प्रहरी थे

गाओ
कॉमरेड गाओ
धरती के भाई ! तुम गाओ
अग्नि के अच्छे पिता !
हम सबके लिए गाओ
उन सबके लिए गाओ
जो मछलियाँ पकड़ते हैं
या ठोंकते हैं कीलें अपने हथौड़ों से
कातते हैं रेशम के कठोर धागे
या कूटते हैं काग़ज़ की लुगदी
छापते हैं जो मशीनों पर रात-दिन
उन न सोने वाले लोगों के लिए गाओ
जो जागते हैं क़ैद में
आधी-आधी रात तक
परेशान हैं, दुखी हैं
पिस रहे हैं दोहरे अत्याचार में
और जो खड़े हैं भट्टी के सामने
पिघलते ताम्बे के लिए
गलते लोहे के लिए
बारह हज़ार फ़ीट ऊपर
एण्डेस के बँजर अकेलपन में

गाओ
मेरे दोस्त
सदा गाते रहो तुम

तुम
जिसने तोड़ी
मूक नदियों की ख़ामोशी
जब उनमें बह रहा था रक्त
जिसमें से गूँजी थी आवाज़ तुम्हारी

गाओ
कि आवाज़ तुम्हारी
लाती है
उन सबको एक जगह साथ
जो नहीं जानते एक-दूसरे को
थोड़ा भी आपस में

अब
दूर उराल में
पैण्टागन की खोई हुई बर्फ़ पर
तुम गा रहे हो
अन्धेरे के पार
दूर बहुत दूर
और समुद्र
बँजर भूमि
भट्टी झोंकने वाला वह युवक
घूमता हुआ शिकारी
और गिटार बजाता वह अकेला काउब्वॉय
सब तुम्हें सुन रहे हैं

और तुम्हें सुन रहा है
वेनेजुएला की उस उपेक्षित क़ैद में
जीसस फ़ारिया
वह सज्जन विद्वान
सुन रहा है
शान्त गड़गड़ाहट
तुम्हारे गीतों की

तुम गाते हो इसीलिए
जानते हैं वे सब
कि समुद्र ज़िन्दा है
औ’ गाता है वह
मेरे दोस्त
वे जानते हैं कि
स्वतन्त्र है समुद्र
विशाल और चौड़ा है, फूलों से भरा है
तुम्हारी आवाज़ की तरह

सूरज हमारा है, धरती हमारी होगी
ओ सागर के प्रकाशस्तम्भ !
तुम गाते रहोगे लगातार ।

अँग्रेज़ी से अनुवाद : अनिल जनविजय