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प्राण सींचती / रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

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64
जग सुन्दर
सुन्दर मन -ताल
भावों की छाया ।
65
सूने हैं तट
आती नहीं आहट
नीर अधीर।
66
थकीं लहरें
बाँचे अनवरत
तीर की पीर।
67
नहाने आते
जब चाँद -सितारे
तट हर्षाते ।
68
नदियाँ सूखीं
उजड़े पनघट
गलियाँ मौन।
-0-7/2/2015
69
प्राण सींचती
सामगान -सी वाणी
सद्यस्नाता- सी।
70
नश्वर काया
तुम्हारी मोहमाया
बाँधे है मुझे।
71
आँसू तुम्हारे
भिगोएँ मेरा सीना
मैं बड़भागी।
72
रातों में जागूँ
तुम्हारे लिए ही मैं
दुआएँ माँगूँ ।
73
अंक में भरो
उलझी नेह -डोर
सुलझा भी दो।
74
प्राण अटके
तुम न मिल सके
हम भटके।
75
आँसू से धोए
सभी जीवन-द्वार
मिला न प्यार।