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प्रेम कविता / रोके दाल्तोन / अनिल जनविजय

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वो उनमें से एक था
जिन्होंने पनामा नहर को चौड़ा किया
(और उसे सोने की कमाई की जगह
चान्दी की कमाई वाली नहर बना दिया),

वो उनमें से एक था
जिन्होंने कैलिफोर्निया में सैन्य ठिकानों पर,
प्रशान्त महासागर में घूमने वाले
समुद्री जहाज़ी बेड़े की मरम्मत की,

वो उनमें से एक था
जो लोग मेक्सिको, होण्डुरास,
निकारागुआ, ग्वाटेमाला की जेलों में बन्द हैं,
जिन्हें चोर, तस्कर और बदमाश कहा जाता है
जिन्हें संदिग्ध अपराधी के रूप में पकड़ लिया जाता है
और भूखा रहने के लिए मजबूर किया जाता है,

(लाइए, मैं इस व्यक्ति को आपके सामने लाता हूँ
उसे एक आशिक होने के शक में गिरफ़्तार किया गया था
और इसलिए भी क्योंकि वह सल्वाडोरी था),

वो उनमें से एक था
जो बार और वेश्यालयों में जमा हो जाते थे
और इलाके के सभी बन्दरगाहों और
नीली गुफ़ा, द पैण्टी और हैप्पीलैण्ड जैसी उन राजधानियों में
जिन्हें अपराधियों के सरगना होने का गौरव प्राप्त है
यानी विदेशी जंगलों में मक्का उगाते थे,

वो उनमें से एक था
जो कभी यह नहीं जानते हैं कि वे कहाँ के रहनेवाले हैं,
जो दुनिया के सबसे अच्छे कारीगर माने जाते हैं
जिन्हें सीमा पार करते समय
गोलियों से छलनी कर दिया जाता था,

वो उनमें से एक था     
जो मलेरिया से मारे गए
या बिच्छू या पीले साँपों के काटने से
केले के बागानों में और नरक में,

वो उनमें से एक था 
जो लोग राष्ट्रगान के लिए नशे में रोते थे
प्रशान्त महासागर के क्षेत्र में चक्रवात आने पर
या उत्तर में हिमपात होने पर मारे जाते थे,

वो उन मज़दूरों, भिखारियों,
नशेड़ियों में से एक था 
जिन्हें विशाल सल्वाडोरी वेश्या के बेटे कहा जाता है,

वो उन थोड़े से भाग्यशाली लोगों में से एक था
जिन लोगों ने बड़ी मुश्किल से सल्वाडोर को
फिर से सल्वाडोर बनाया,

जिन पर हमेशा के लिए
अवैध सल्वाडोरी होने का ठप्पा लगा हुआ था
जो सबकुछ बनाते, बेचते और खाते हैं
और हमेशा सबसे पहले चाकू बाहर निकालते हैं,

वो, जो दुनिया के सबसे दुखी लोग हैं,
मेरे देशवासी हैं,
मेरे भाई हैं !

मूल स्पानी से अनुवाद " अनिल जनविजय

लीजिए, अब यही कविता मूल स्पानी में पढ़िए
                    Roque Dalton
                  Poema de Amor

Los que murieron en el canal de Panamá
(y fueron clasificados como silver roll y no como gold roll),
los que repararon la flota del Pacífico
en las bases de California,
los que sse pudrieron en las cárceles de Guatemala,
México, Honduras, Nicaragua,
por ladrones, por contrabandistas, por estafadores,
por hambrientos,
los siempre sospechosos de todo
(“me permito remitirle al interfecto
por esquinero sospechoso
y con el agravante de ser salvadoreño”),
las que llenaron los bares y los burderles
      de la zona
(“La Gruta Azul”, “El Calzoncito”, “Happyland”),
los sembradores de maíz en plena selva extranjera,
los reyes de la página roja,
los que nunca sabe nadie de dónde son,
los mejores artesanos del mundo,
los que fueron cosidos a balazos al cruzar
      la frontera,
los que murieron de paludismo
o de las picadas del escorpión o de la barba amarilla
en el infierno de las bananeras,
los que lloraran borrachos por el himno nacional
bajo el ciclón del Pacífico o la nieve del norte,
los arrimados, los mendigos, los marihuaneros,
los guanacos hijos de la gran puta,
los que apenitas pudieron regresar,
los que tuvieron un poco más de suerte,
los eternos indocumentados
los hacelotodo, los vendelotodo, los comelotodo,
los primeros en sacar el cuchillo,
los tristes más tristes del mundo,
mis compatriotas,
mis hermanos.