भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

प्रेम / हरीश करमचंदाणी

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

अभी चुका नहीं हैं
बेहद प्रचलित यह शब्द
प्रेम
अर्थ की गरिमा और पवित्रता के साथ
खड़ा हैं तन कर
मैं चाहता हूँ टाँक दूं उसे
तुम्हारे जूडे में फूल की तरह
उसकी पंखडियों में
खिल रही हैं इच्छाएं
आ रही हैं लगाव की महक
यकीनन चिड़िया चहकना
और हवा बहना नहीं छोड़ेगी
बिना जाने भी
प्रेम की परिभाषा