भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

फ़्रांसिसी मर्द की रखैल / त्रान ते ज्योंग

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

तोड़ते-मरोड़ते इसे, वह फेंक देती है अंगूठी नदी में
और छोड़ देती है अपने शेखीबाज़ शौहर को उसकी लोलुप-लिप्साओं पे।

आज-दिन से, मंदिर उसका घर होगा।
इसके बुद्घों की सोहबत में, उसे ज़रूरत नहीं पडेगी
शौहर या बच्चों की। नहीं, मैं आपको बतला देता
प्रार्थनाएँ उसके लिए कोई मतलब नहीं रखतीं,
तिस पर भी यह कुछ जँचता नहीं कि
ऐसी एक गुड़िया पीठ कर ले दुनिया पर
एक देवता की ग़ैर-मौजूदगी तलाशने।

शीरीन बाला, इस दुनिया से मुझे बांधने वाले
कर्ज़ और कर्त्तव्य गर मेरे नहीं होते, मैं होता वह पहला
उस मंदिर में तुमसे जा मिलने जहाँ हमारे मिज़ाज
तृष्णा की अपनी भिन्नता का शमन करते साथ-साथ।
   
अंग्रेजी से भाषान्तरः पीयूष दईया