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फ़्रेकतालिया — एक कविता थी वो / डोरिस कारेवा / अनिल जनविजय

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फ़्रेकतालिया — एक यूरोपीय स्त्रीयोचित नाम है, जिसका अर्थ होता है — पूरी तरह से समर्पित

एक दार्शनिक और बैले-नर्तकी के
अजीब, रहस्यमय संगम का
परिणाम थी वह
सौन्दर्य और सच्चाई के
क्षणिक प्रेम-आलिंगन का,
मूर्च्छित दुनिया के दो ध्रुवों के बीच
पल भर के लिए
मन में पैदा हुई सुरीली झँकार थी नगीच ।

सोच-विचार जैसे नाटकों के लिए
उसका माथा
छायाओं का था रंगमंच
उसकी कलाइयों में झलकती थी
राजसी छवि स्वच्छन्द

उसकी रगों में बहता था
नीला ! आह, नीला ख़ून !
जिससे
एक अज्ञेय आकृति-सी बन जाती थी
उसकी पारभासी त्वचा के नीचे दोनों जून
उसके भीतर थी एक लय, एक ख़ामोशी
एक थाह-हीन, निर्मल और और खारे समुद्र की बेहोशी

न वह ख़ुद को जानती थी, न अपने असर को
बड़ी-बड़ी आँखों वाली उस लड़की ने
लोगों की आँखों की चमक में, उनकी तमक में,
उनकी झिझक में देखा था अपने प्रसर को ।
उसके लिए इतना काफ़ी था
कि वो है और
दुनिया उसके आसपास झिलमिलाती है
कल्पना खिलखिलाती है ।

एक बार
जब दहलीज पर ही थी रात
उसके साथ हुई यह बात
इधर-उधर नज़रें घुमाती हुई
एक आइने से टकराई वह जाती हुई ।
हाँ, वनिता थी वो ।
एक कविता थी वो ।

अँग्रेज़ी से अनुवाद : अनिल जनविजय

और लीजिए, अब यही कविता अँग्रेज़ी अनुवाद में पढ़िए
                     Doris Kareva
          Fraktalia — She was a poem

She was the fruit of the strange mysterious marriage of a
ballerina and a philosopher; of a fleeting loving embrace of
beauty and truth, a transient chime of polarities amidst
fainting worlds.

Her forehead, a stage for shadows, thought´s play; the grace
of her wrists hid royal unpredictability.

Blue, oh! blue was the blood pulsating in her veins that
under her translucent skin formed an enigmatic pattern.
This rhythm, this peace was in her, was her - like an ocean
- fathomless, clear and salty.

Neither did she know herself nor her influence. Wide-eyed,
she looked at her reflection in the sparkle of people´s eyes, in
their rage, in their fear. She existed and that was enough; the
world shimmered through her, moulding the imagery.

Once, at the threshold of night a glance into the revolving
mirror suddenly struck home.
She was a poem.

Translated by Doris Kareva