भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार
Roman

बंजारे दिन / मधुप मोहता

Kavita Kosh से
यहां जाएं: भ्रमण, खोज


बंजारे दिन घूम रहे हैं,
गांव-गांव कुछ ढूंढ़ रहे हैं।
तुम्हें याद है ? तुमने, मैंने,
ले-देकर इस दौड़-भाग में
क्या पाया है, क्या खोया है ?

घूम-घूमकर सांझ सकारे, थककर हारे,
बंजारे दिन, क्या ढूंढ़ रहे हैं ?
पर्वत-पर्वत नदी किनारे,
लिए हाथ में हाथ तुम्हारा, तुम्हें याद है ?
तेरी याद में, मेरा दिल कितना रोया है ?

सुलग-सुलगकर, जलते, बुझते
दिन बेचारे, धुआं-धुआं से ऊंघ रहे हैं।

बंजारे दिन घूम रहे हैं।

वैयक्तिक औज़ार
» रचनाकारों की सूची
» हज़ारों प्रशंसक...

गद्य कोश

कविता कोश में खोज करें

दशमलव / ललित कुमार
(परियोजना सम्बंधी सूचनाएँ)