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बचपन-3 / मुनव्वर राना

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मैं हूँ मेरा बच्चा है खिलौनों की दुकाँ है
अब कोई मेरे पास बहाना भी नहीं है
                       **
ऐ ख़ुदा फूल-से बच्चों की हिफ़ाज़त[1]करना
मुफ़लिसी[2]चाह रही है मेरे घर में रहना
                       **
ऐ ख़ुदा तू फ़ीस के पैसे अता कर दे मुझे
मेरे बच्चों को भी यूनिवर्सिटी अच्छी लगी
                       **
मुफ़लिसी ! बच्चे को रोने नहीं देना वरना
एक आँसू भरे बाज़ार को खा जाएगा
                       **
खिलौनों के लिए बच्चे अभी तक जागते होंगे
तुझे ऐ मुफ़लिसी कोई बहाना ढूँढ लेना है
                     **

शब्दार्थ
  1. सुरक्षा
  2. दरिद्रता, ग़रीबी