भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

बन्ना जोबनिया जलेबी भरी रस की / हिन्दी लोकगीत

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

   ♦   रचनाकार: अज्ञात

बन्ना जोबनिया जलेबी भरी रस की

थारे साथ चलुगी म्हारे जंच गई
बन्ना बाबा जी से कहियों म्हारा मन की
बन्ना ताऊ जी से कहियों म्हारा मन की
थारे साथ चलुंगी म्हारे जंचगी
हाथी लाइयो घोड़ा लाइयो मोटर कार
संग में बाराती लाइयो लाइयो रिस्तेदार
बन्ना थारी और म्हारी जोड़ी जंचगी
थारे साथ चलुंगी म्हारे जंचगी..

बन्ना जोबनिया जलेबी......

बन्ना जोबनिया जलेबी भरी रस की
थारे साथ चलुगी म्हारे जंच गई
बन्ना पापा जी से कहियों म्हारा मन की
बन्ना चाचा जी से कहियों म्हारा मन की
थारे साथ चलुंगी म्हारे जंचगी
हाथी लाइयो घोड़ा लाइयो मोटर कार
संग में बाराती लाइयो लाइयो रिस्तेदार
बन्ना थारी और म्हारी जोड़ी जंचगी
थारे साथ चलुंगी म्हारे जंचगी..

बन्ना जोबनिया जलेबी......

बन्ना जोबनिया जलेबी भरी रस की
थारे साथ चलुगी म्हारे जंच गई
बन्ना मामा जी से कहियों म्हारा मन की
बन्ना फूफा जी से कहियों म्हारा मन की
थारे साथ चलुंगी म्हारे जंचगी
हाथी लाइयो घोड़ा लाइयो मोटर कार
संग में बाराती लाइयो लाइयो रिस्तेदार
बन्ना थारी और म्हारी जोड़ी जंचगी
थारे साथ चलुंगी म्हारे जंचगी..

बन्ना जोबनिया जलेबी......