भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

बन जाएगा पहाड़ / स्वाति मेलकानी

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

     सीढ़ीदार खेतों में उगे
     मटमैले हाथ-पैर,
     झुर्रियों से
     झुलसते चेहरों मे चिपकी
     पानीदार आँखें,
     नदियों के साथ
     ढुलकती बोतलों में
      कैद होकर
     मैदानों को बहती जवानी,
     रख दो
     एक के ऊपर एक
     बन जाएगा पहाड़।