भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

बहुत पास / हरीश करमचंदाणी

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

हर तारा चमकता हैं
अँधेरे को चीरती हैं रोशनी
अनगिनत आँखों तक पहुँचती हैं
हर तारा कितना अकेला हैं
मगर बेचारा नहीं कोई
कितना सुन्दर
आँखों का तारा
हर तारा
कितना प्यारा