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बाग रे बगीचवा हे / अंगिका

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   ♦   रचनाकार: अज्ञात

वही फूल बगिया गे अम्मा माय कोइलो जे बोलै हे।
कोइलो बोललै हरिनाम हे।
भक्ता लगैलकै रे सेवका- बाग रे बगीचवा रे।
सेवका लगैलकै फूल बाग हे।
बही गेलै पूरबा गे अम्मा माय- बही गेलै पछिया हे।
शीतल मैया नीनोॅ से निचित हे।
उठूँ- उठूँ- उठूँ गे अम्मा माय कत्तेॅ नानेॅ सुतली हे।
दुखिया नेॅ टेकलेॅ दुआर हे।
हम्में कैसे उठवो रे भगता- तोहरा के बोल सुनी
तोहरा के बडॅ छौ रे गुमान रे।
भूखें जे खैलकौ गे अम्मा माय- अछदेॅ के धान हे कुटी।
पिआसें पियलकौ गंगा नीर हे।
नंगटी पहरौ गे अम्मा माय लहरी पटोरबा हे।
चोंकें हेरैलकौ अरघेॅ दूधें हे।
भूललो चूकलो गे अम्मा माय- माफ करि देवेॅ हे।
लागौ मैया बालका गोहार हे।