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बाद बिछुड़ने के / धीरेन्द्र अस्थाना

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बाद बिछुड़ने के हुआ मालूम ,
वो मेरे कितने करीब थे !

था मै नाचीज़ उनके लिए पर,
मेरे लिए वो नसीब थे  !

गैरो में गिनता था खुद को ,
पाया तो वो बड़े अज़ीज़ थे !

थी जो दिले - जागीर पास मेरे ,
लूटे तो सबसे गरीब थे  !

बाद बिछुड़ने के हुआ मालूम ,
वो मेरे कितने करीब थे !