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बाद मुद्दत के ....... / आनंद कृष्ण

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एक ग़ज़ल : बाद मुद्दत के .......

बाद मुद्दत के इक हंसी देखी।
एक मजलूम की खुशी देखी।
उनको देखा तो यूँ लगा मुझको-
जैसे बर-बह्र शाइरी देखी।
दिल के हाथों ही हम हुए मजबूर
हमने ऐसी भी बेबसी देखी।

है सितारा बुलंद किस्मत का-
उनकी आँखों में बेखुदी देखी।

नींद- तेरा बड़ा है शुकराना
ख्वाब में हमने आशिकी देखी।

यूँ हुआ इल्म मुक़म्मल अपना-
हमने जब प्यार-दोस्ती देखी।