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बाद में / हरीश करमचंदाणी

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वे चुप थे
जब हो रही थी हत्या
उनके सामने
हाँ ,उन्हें आ रही थी अब शर्म
कि हत्या हो रही थी और वे चुप थे
 किया नहीं प्रतिरोध
जरा सा भी नहीं ,
उन्हें सचमुच शर्म आ रहीं थी
पर क्या फर्क पड़ता
अगर उन्हें शर्म नहीं भी आ रही हो अब
हत्या हो चुकी थी