भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

बीकानेर-4 / सुधीर सक्सेना

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

बीकानेर में
चौराहे पर प्रतिमा
निरभ्र आकाश तले
जीती जागती सी जीवंत

अगरचे ऐड़ लगा दे घुड़सवार
तो न जाने कहां जाकर रुके घोड़ा
मगर ऐड़ नहीं लगाता घुड़सवार
यूं कि उसे भाता है बीकानेर
उसके ख्वाब में भी नहीं बीकानेर छोड़ने का ख्याल

सोचो तो जरा
गर घोड़ा नहीं
और नहीं शहसवार
तो काहे का चतुष्पथ
और काहे का बीकानेर