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बुड्या जवाई / योगीन्द्र पुरी

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1.
बुढ्याकू बेटि क्या देणि छ
मुणडमा आपदा लेणि छ,
वर्ष द्वी मांज मरि जाँदो छै
छोरि[1] कू रांड करि जांदो छ।

2.
मुर्खलो[2] खोसि जब रोंदी वा
दुःख का बैन यना बोदि वा,
बाबा जी तुमन क्यों सैंत्यो मैं
फेंकणया होइ कनु व्वेकु मैं।

3.
माजि तिन कोखि क्यों राख्यो मैं
होंद ही केकु नी फेंक्यो मैं,
केकुतैं लाड़ करि पालयो मैं
फेर ये दुःख मां डाल्यों मैं।

4.
त्वेन जो बेटि नी जाण्यों मैं
गोरू या भैंससी जारयों मैं,
पन्द्रसौ लेणिछै त्वैमेरी
यांकुही होइ तू मां मेरी।

5.
धर्मदी कर्म नीजाण्यों जो
जात्यादी रूपभी नीमान्यों जो,
शोचदा वर्ष मैनौकी छौं
साठ का बुढ्या कू दीने छौं।

6.
बेचितैं पुडांड़ि[3] अर कूडी[4] कू
पन्द्रसौ दीनि त्वे पापी कू,
बाबा जी त्वेकू ह्वै सौकारी
मेरारै भाग मा जीलारो।

7.
कीराकी होइ दै जो काले
चाँदिसी चमकदी वो वाले,
हारादी छड़ा छन सी मैकू
दैव यनु ना करी तू कैकू।

8.
माजि तिन थैलि पर दीने डीठ
बेटिकू फेरी जो यनि पीठ,
त्वेकू वा थेली ही रई जान
लोक परलोक ना हो यो यान।

9.
कै घड़ी दिन्या तिन मैंकु बांद
वर्ष का बीच ह्वैग्युं राँड,
त्योंखि भी मैकू तैंनीछ आज
दैव ही रखलो मेरी लाज।

10.
गैणा जो लोगु का पर थारी
तौं की भी बात रै दिन चारी
नाक पर मुर्खलो रये मेरा
स्योभि छै मासमा गये डेरा।

11.
मार अर गालि देंदान सोरा
सैसुरी मैतिनी क्वीभि मेरा,
पूछरो आज नी क्वीभि मैकू
बाबा जी रोण मिन क्या आज त्वेकू।

12.
क्वीभि शुभ काम जब होंदान
मैकू तैं क्वीभिनी बोदान,
सभी मा बैण वख जांदिन
गीत अर मांगल गाँदिन।

13.
कब्बि जो भूलिकी गैगी मैं
राँड निर्लज्ज बस ह्वैगी मैं,
मैकु तैं डैणा सब बोदान
देखि मैं खाण जनु औंदान।

14.
राँड कू बारनी त्यौहार
राँड कू केकुछौ शृंगार,
राँड ह्वै डोमू से भि नीच छ
राँड को जगतमा क्वीभि नीछ।

15.

मुख भी स्वामि को नी देख्यो
सुख संसार को नी देख्यो,
स्वीणा नी देखे सुख की रात
लाण औं खाणकी क्या बात।

16.
बालि ही राँड मैं ह्वैग्यूं जो
जन्म की दुःखिया रैग्यू जो,
दोष यां माँग नी क्वी मेरो
बाबा जी पाप छ यो तेरो।

17.
दुखि ये चित्त की हड्कार
रोणु बी पीटणू फिड्कार,
कल्लो तै बंश को संहार
जागलो तब्बि यो संसार।

18.
थैलि कै काम जो ऐ जाली
भैंसि वा भेल कू ह्वै जाली,
मुकद्मा जोर को लै जालो
थैली ”योगीन्द्र“ वो खैजालो।

शब्दार्थ
  1. लड़की
  2. कानों का जेवर
  3. खेत
  4. मकान