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बूढ़ी औरतों की दास्तान / तादेयुश रोज़ेविच / असद ज़ैदी

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मुझे पसन्द हैं बूढ़ी औरतें
बदसूरत औरतें
लीचड़ औरतें
वे इस धरती का नमक हैं

वे घृणा नहीं करतीं
मनुष्य के मल से
वे जानती हैं दूसरा पहलू
सिक्के का
प्यार का
ईमान का

आते हैं जाते हैं
तानाशाह मसख़रे
इनसान के ख़ून से
हाथ रँग लेते हैं

बूढ़ी औरतें अलस्सुबह उठती हैं
गोश्त फल ब्रेड ख़रीदती हैं
घर साफ़ करती हैं, खाना पकाती हैं
सड़क पर हाथ बान्धे
ख़ामोश खड़ी रहती हैं

बूढ़ी औरतें
अमर हैं
हैमलेट जाल में फँसा तड़पता है
फ़ाउस्ट हास्यास्पद और घिनौनी भूमिका अदा करता है
रस्कोल्निकफ़[1] कुल्हाड़ी से वार कर डालता है

बूढ़ी औरतें
अनश्वर हैं
वे मुस्कुराती हैं एक करुणामय मुस्कान
ईश्वर मर जाता है

बूढ़ी औरतें हस्बे मामूल उठती हैं
अलस्सुबह ब्रेड शराब मछली ख़रीदती हैं
सभ्यता मर जाती है
बूढ़ी औरतें अलस्सुबह उठती हैं
खिड़कियाँ खोलती हैं
बाहर जाकर कूड़ा फेंक आती हैं
आदमी मर जाता है

बूढ़ी औरतें
मुरदे को नहलाती हैं
दफ़नाती हैं
क़ब्रों पर फूल
लगाती हैं
मुझे पसन्द हैं बूढ़ी औरतें
बदसूरत औरतें
लीचड़ औरतें
वे शाश्वत जीवन में विश्वास करती हैं
वे धरती का नमक हैं
दरख़्त की छाल हैं
जानवरों की निरीह आँखें हैं

कायरता और बहादुरी को
महानता और क्षुद्रता को
वे उनके सही अनुपात में
दैनिक जीवन की माँगों के मुताबिक़
नापकर देखती हैं
उनके बेटे अमरीका खोज लेते हैं
थरमॉपिलै में मरते हैं
सलीब पर टाँग दिये जाते हैं
ब्रह्माण्ड को जीत लाते हैं

बूढ़ी औरतें सुबह उठकर
दूध ब्रेड गोश्त ख़रीदने शहर जाती हैं
शोरबा बनाती हैं
खिड़कियाँ खोलती हैं
सिर्फ़ वज्र मूर्ख ही हँसते हैं
बूढ़ी औरतों पर
बदसूरत औरतों पर
लीचड़ औरतों पर
क्योंकि वे सुन्दर औरतें हैं
दयालु औरतें हैं

बूढ़ी औरतें
अण्डे की तरह हैं
रहस्यहीन भेद हैं
एक लगातार लुढ़कती गेंद हैं
बूढ़ी औरतें
पवित्र बिल्लियों की
ममियाँ[2] हैं
या तो वे पायी जाती हैं
सिकुड़कर छोटी हुई झुर्राई हुई
सूखे जलस्रोत
सूखे फल जैसी
या मोटे
गोलमटोल बुद्ध जैसी

और जब वे मरती हैं
तो एक आँसू
गाल से ढुलककर
एक युवा औरत के
चेहरे की मुस्कान से
जा मिलता है

शब्दार्थ
  1. दस्ताएव्स्की के महान उपन्यास ‘अपराध और दण्ड’ का नायक
  2. मसाला लगाकर रखे गए पुराने शव