भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

बेवफाई जो तुमने की तो कोई बात नहीं / आशीष जोग

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज


बेवफाई जो तुमने की तो कोई बात नहीं,
इसमें नज़रें चुराने की तो कोई बात नहीं |

दिल ही टूटा है अभी मैं तो नहीं टूटा हूँ,
इतना मातम मनाने की तो कोई बात नहीं |

बात ये तेरे मेरे बीच में ही रहने दो,
ग़ैर को ये बताने की तो कोई बात नहीं |

कितनी कोशिश करो दिल की ख़लिश नहीं जाती,
इतना भी मुस्कुराने की तो कोई बात नहीं |

हमने माना कि अभी वक़्त बुरा है अपना,
फिर भी मायूस होने की तो कोई बात नहीं |

दिल से बेबस हूँ दिल ये बस में नहीं है मेरे,
मुझ पे तोहमत लगाने की तो कोई बात नहीं |

तेरी इस बेरुख़ी से हो गयी है यारी अब,
इसमें हैरत जताने की तो कोई बात नहीं |