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बौ का हात भली रसाण / गढ़वाली

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   ♦   रचनाकार: अज्ञात

बौ का हात भली रसाण

मारी बाखरी, पूज्यो मसाण[1],
बौका[2] हात, भली रसाण[3]!
सड़क फुंड बाखरा मेरा,
ब्याखनदां[4] जाण, बौ का डेरा!
बौ छ मेरी छोटी छौनक[5],
बौ का बौंड[6], भली रौनक।
उबा बणू बल हिंसरी गोंदा,
छोटी बौ बडू छ फोंदा!
पल्यापताला[7] वासी त कवा[8],
बौ बणीगे, बजारी हवा।
बौ च मेरी रिक पठोली[9],
बौ की धोती कैन लटोली[10]?

शब्दार्थ
  1. एक देवता
  2. भाभी के
  3. रस
  4. शाम
  5. छौना की तरह
  6. ऊपर की मंजिल
  7. घाटियों में
  8. कौआ
  9. छोना
  10. देखी