भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
  काव्य मोती
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

भोर / सांवर दइया

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

भोर री बेळा
रसियै सूरज
चोरी-चुपकै सूं आय’र
कर नाख्यो
        आभो लाल
जाणै कोई बहनोई
होळी खेलण रै मिस
साळी रै गालां माथै
मसळ दी हुवै
        गुलाल ।