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मनुष्य-मछली युद्ध / रघुवीर सहाय

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जो मछलियाँ मीठे पानी में रह रही हैं
उन्हें हम समुद्र में डाल रहे हैं,
क्योंकि मीठे पानी की मछलियाँ बिकती हैं
क्योंकि हम समुद्र से मछलियाँ पकड़ते हैं
क्योंकि हमारी नावें विकराल हैं
नदी में समाती हैं

हम मछलियाँ पकड़ते हैं क्योंकि उन्हें
डब्बे में बंद कर बेचेंगे
डब्बे में बंद मछली हमारे लोकतंत्र का प्रतीक है
हरेक के लिए ताज़ी मछली की तरह उपलब्ध

हम विज्ञान को जीत रहे हैं
मछली को डब्बे में बंद करने के लिए
उस मछली को मीठे पानी में न रहने देने के लिए
विधि आविष्कार कर रहे हैं

मगर विज्ञान हमको जो आंकड़े देता है
वे बताते हैं कि मछलियों में समुद्र से
कूटकर मीठे पानी में जाने की अदम्य इच्छा है
हम मछली की नस्ल तगड़ी कर रहे हैं
ताकि वह स्वादु हो
और मंहगी भी

मछली तगड़ी हो रही है और मीठे पानी में
लौट आने को ताक़त से तड़प रही है

हम विज्ञान से इन नतीजों पर पहुंचे हैं
कि हमें मछली को समुद्र में डालकर
उसे इतनी जल्दी मार लेना होगा
कि वह नदी में फिर न आने पाए