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मन के कुंदरा मा आजा रे संगवारी / शकुंतला तरार

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मन के कुंदरा मा आजा संगवारी रे मोर
छानी छाबो मया के दूनो बइहाँ ला जोर

मोर आंखी के पुतरी मा बइठे हवस
मोर हिरदे के दसना मा ढलंगे हवस
झटकिन आजा तय संगी लुकाए कती
तोर मया के खजाना चोरावय झिन चोर
छानी छाबो मया के दूनो बइहाँ ला जोर

मोर साँसा चलत हे तोरेच नाव ले
मोर आसा के दीया तोरेच ठाँव ले
गुड़ी मोर घर देंवता बन के आजा गोई
बीच भंवरी मा डोंगा ल झन तय चिभोर
छानी छाबो मया के दूनो बइहाँ ला जोर

तय जे किसना होते राधा बनतेवं संगी
सुनके बंसरी के धुन ल हो जातेवंबही
तोर जिनगी के खूटा मा दँवरी बनतेवं
रद्दा देखत झिन टूटय ए जिनगी के डोर
छानी छाबो मया के दूनो बइहाँ ला जोर