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मशवरा: दो / शीन काफ़ निज़ाम

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बहुत पुरानी
हमारे रिश्तों की सब क़बाएँ[1]
जगह-जगह से
इसीलिए सब मसक रही हैं
उतारें इन को!?
प्राने कपड़ों के गंदे गट्ठर में
बन्द कर दें
कभी कोई-
सब फ़टे-पुराने हमारे कपड़े
ख़रीद लेगा
और इन के बदले
चमकता-सा कुछ थमाए शायद...


शब्दार्थ
  1. वस्त्र (कबा का बहुवचन)