भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

मस्ती ब-ज़ौक़-ए-ग़फ़लत-ए-साक़ी हलाक है / ग़ालिब

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

मस्ती ब-ज़ौक़-ए-ग़फ़लत-ए-साक़ी हलाक है
मौज-ए-शराब यक-मिज़ा-ए-ख़्वाब-नाक है
 
जुज़ ज़ख्म-ए-तेग़-ए-नाज़ नहीं दिल में आरज़ू
जेब-ए-ख़याल भी तिरे हाथों से चाक है

जोश-ए-जुनूँ से कुछ नज़र आता नहीं असद
सहरा हमारी आँख में यक-मुश्त-ए-ख़ाक है