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मात्सुओ बाशो के हाइकु / सत्यभूषण वर्मा

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»  मात्सुओ बाशो के हाइकु

(1)
जापानी हाइकु
सामिदारे नो
फुरिनोकोशिते या
हिकारि दोओ
हिन्दी भावानुवाद
मई की वर्षा
भीगने से बचा है
स्वर्णिम गर्भगृह
(2)
हिन्दी भावानुवाद
गौशाला के अन्दर
मच्छरों की मन्दिम गुनगुनाहट-
बाहर पतझड़ की तेज हवाएँ
(3)
बिजली चमकी
और एक रात के हेरान की चीख
अंधकार चीरती चली गई
(4)
वर्षा के लिए
है दस हाथ चौड़ी,
दस हाथ ऊँची
यह मेरी छोटी-सी कुटिया
अन्यथा,
त्याग देता मैं इसे भी।

अनुवादक सत्यभूषण वर्मा