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मासाओका शिकि / परिचय

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इनका बचपन का नाम था ‘सुनेनोरी’ । ‘शिकि’ उपनाम चुना जिसका अर्थ है -कोयल जो कण्ठ में र्क्त आने तक गाए । तत्कालीन हाइकु कृत्रिमता से भरे थे । इस्सा के चिन्तन ने नए और पुराने की बीच द्वन्द्व को रेखांकित किया । इन्हे केवल 35 वर्ष का जीवनकाल मिला । चित्रकारी और कविता की अभिरुचियाँ इन्हे बचपन से मिली थी ।‘हाइकु’ नाम इन्हीं के समय में प्रचारित और स्थापित हुआ । इन्होंने सभी गलित रूढ़ियों और आस्थाओं का विरोध किया । गरीबी औत तपेदिक की बीमारी ने इनको शय्या -सेवन के लिए बाध्य कर दिया । बहन ‘रित्सु’ ने इनकी खूब सेवा की। रुग्ण शरीर शिकि अन्तिम श्वास तक लिखते गए और अपना उपनाम सार्थक कर दिया ।