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मिट्टी खाने वाला / के० सच्चिदानंदन

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जब खाने को कुछ भी न बचा
तो काले बच्चे ने मिट्टी खा ली,
जब माँ छड़ी लेकर आई
तो उसने मुँह खोल दिया,
माँ ने उसमें तीनों लोक देखे;

पहले में
सोने से निर्मित युद्ध-विमान थे,
दूसरे में
अनेक देशों से लूटा गया
धन व चावल,
तीसरे में
भूख, मक्खी और मौत,

वह उससे मुँह बन्द करने के लिए चीखी
उसमें रखने के लिए
एक मुट्ठी चावल न होने के कारण,

बाद में उन्हें
कारागार की ठंडी फर्श पर देखा गया था
यातना दे-देकर मार दिए गए
दो भूमिगत बागी.