भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

मुंबई / गुलज़ार

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

रात जब मुंबई की सड़कों पर
अपने पंजों को पेट में लेकर
काली बिल्ली की तरह सोती है
अपनी पलकें नहीं गिराती कभी,--
साँस की लंबी लंबी बौछारें
उड़ती रहती हैं खुश्क साहिल पर!