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मुश्किल के दिन भी काटें हैं इस एतबार में / ममता किरण

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मुश्किल के दिन भी काटें हैं इस एतबार में
देखेंगें जिंदगी को कभी तो बहार में।

जो भी किया है उसने अता पास है मेरे
मन की मुराद पाना है कब इख़्तियार में।

कह के गया है मुझसे न आने को फिर कभी
आँखें बिछी है फिर भी मेरी इंतजार में।

साँसें भी अपनी छोड़कर आ जाऊं तेरे पास
कैसी अजब कशिश है ये तेरी पुकार में।