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मुसलमान होने में इसलिए हिन्दू होने में थोड़ी दिक्कत तो है / देवी प्रसाद मिश्र

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अब जिन दिन ऑरलैंडो में कइयों को उमर सादिक मतीन ने मार दिया तो
दफ्तर में काम करने वाले नोमान खान अचानक
क्षमा प्रार्थी दिखने लगे।

कि जैसे उसमें उनकी भी कोई भूमिका हो
कि जैसे तमाम इस्लामी राष्ट्र राज्यों में जम्हूरियत का टोटा क्यों है
इसकी कोई न कोई जिम्मेदारी उनकी भी बनती हो
कि जैसे नाइजीरिया में बोकोहराम की हैवानियत को
वे प्रभावित कर सकते हों।

यह अमूमन होता है किसी भी आतंकवादी घटना के बाद वे
अचानक खिसियाये से दिखते हैं
उन्होंने अपनी मेज पर छोटा-सा
तिरंगा झण्डा लगा रखा है फेसबुक पर भी।

मैंने उनसे मज़ाक में कहा कि आप यह झण्डा लगाकर भारत का
ज़्यादा अधिक नागरिक होने की कोशिश में हैं।

उन्होंने सूनी आँखों से कहा कि इस समय मुसलमान होने में थोड़ा
दिक़्क़त तो है।

मैंने कहा कि वह तो हर सदी में थी मतलब कि मुसलमान होने
की दिक़्क़त और ईसाई होने की दिक़्क़त और यहूदी होने की
दिक़्क़त।

मैंने कहा कि सदियों से ज्यादा हिन्दू होना कम मनुष्य होने की
दिक़्क़त है।

मैंने उनसे केवल मनुष्य होने की
काफी कम दिक़्क़तों पर बात
कभी और करने का प्रस्ताव किया।