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मेरी ज़िन्दगी का सफ़र अभी बाक़ी है / शी लिज़ी / सौरभ राय

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अपेक्षा नहीं थी ऐसी
मेरी ज़िन्दगी का सफ़र
अभी बाक़ी है
मगर ठिठका-सा है रास्ते में कहीं

तूफ़ान पहले भी आते थे
मग़र पहले कभी
इतने तेज़
इतने घातक होकर नहीं आए
लगातार संघर्ष कर रहा हूँ
मगर सब निरर्थक है

मैं चाहता हूँ खड़ा रहना
मग़र पैर साथ नहीं देते
पेट साथ नहीं देता
मेरे शरीर की तमाम हड्डियाँ साथ नहीं देती
तो बस लेटा हुआ हूँ
यहाँ इस अँधेरे के बीचोंबीच, भेजता हुआ
अपनी व्यथा के पैग़ाम, बार बार लगातार
और सुन रहा हूँ सिर्फ
निराशा की प्रतिध्वनि।

मूल चीनी भाषा से अनुवाद : सौरभ राय