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मेरी बिगड़ी जा सै जात बात सुणियो ध्यान तै मेरी / मेहर सिंह

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जड़ै बैठी थी पंचायत बोल्या जोड़ कै नै हाथ
मेरी बिगड़ी जा सै जात बात सुणियो ध्यान तै मेरी।टेक

अपणी करी तपस्या नै खो रह्या
मार्ग में काटे बो रह्या
हो रह्या सुं घणा विरान, मेरी उम्र सै नादान
मुस्लमान, ज्यान के उपर घाल रहे घेरी।

कुछ ख्याल बात का करियों
मतना गैर जात तै डरियो
बेशक करियों टाला, ख्याल सै शहजादी आला
यो सब का राम रुखाला, माला स्वामी की टेरी।

भुगतणें पड़ै कर्म के भोग
लागग्या बीझण आला रोग
मनै लोग कहें निरभाग लगा रह्या कुल अपणे कै दाग
सब दई वासना त्याग पाग थारे पायां कै म्हां गेरी।

कर्या शहजादी नै तंग
रह्या ना ईब बचण का ढंग
मेहर सिंह लखमीचंद का चेला हो रहा सै ईज्जत का धेला
दो दिन का दर्श मेला, अकेला जा संग ना कोए तेरी।