भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

मेरे जाने के बाद / अनुपम कुमार

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

मेरे जाने के बाद
जो बहुत कुछ रह जायेगा
पास तुम्हारे सुरक्षित
उसे भी चाहो तो प्यार कर सकती हो

मेरे जाने के बाद
जो थोड़ी मीठी कड़वाहट रह जाएगी
तुम्हारे ज़ेहन में अकड़ती हुई
उसी से तुम नफ़रत कर लेना तबतक

मेरे जाने के बाद
जो गंध रुठी रह जाएगी न
तुम्हारे जिस्म पर अलसाई हुई
उसे ही तुम आगोश में कस लेना

मेरे जाने के बाद
जो मेरी यादों की तन्हाई तुम्हें छेड़े
उससे ख़ूब जी भर लड़ लेना तुम
थोडा तो सुकूं मिले तुम्हें भी किसी तरह
    
 मेरे जाने के बाद
जो गर आस का पंछी पालो तुम
उसे प्यार का दाना देना न भूलना
वरना वो मर जायेगा बेवकूफ़ कहीं का

मेरे जाने के बाद
जो थोड़ी-सी तुम मेरे साथ रहोगी
उसे ही सबकुछ मानता रहूँगा मैं
वरना मेरी मौत निश्चित है ऐसे में

मेरे जाने के बाद
मैं भी पूरा कहाँ जा पाउँगा
  ढूँढना यहीं-कहीं इधर-उधर यहाँ-वहाँ
मैं शायद कहीं दिख जाऊं तुम्हें निहारता हुआ