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मैंने अपने सभी झण्डे फहरा दिए / ओक्ताई रिफ़ात / अनिल जनविजय

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मैंने अपने सभी झण्डे फहरा दिए हैं,
मैंने अपने खून के गर्म रंग से शहर को रंग दिया है ।
मैंने सड़क पर पत्थर बिछा दिए हैं, जिनसे मेरा गुस्सा बढ़ा है ।
मैंने अपनी हथेली के पिछले हिस्से से सभी गगनचुम्बी स्तम्भों को एक-बराबर कर दिया है।
मैंने पूरब, पच्छिम, उत्तर और दक्षिण के बीच आपस में प्यार बढ़ाया है,
इस कोने से उस कोने तक छलाँग लगाने के लिए ।

मेरा पहला टिड्डा, मेरे ताले की चाबी है ।

वसन्त की धूप की तरह ताज़ा, बढ़ती हुई मेरी उम्मीदें
मेरी ख़ुशी को एक ऊँचाई देती हैं ।
प्रकाश के भीतर से एक और प्रकाश झलकता है,
फल के अन्दर से एक बीज निकलता है
मेरे सारे नल ख़ाली कर दो, मेरी सारी बारिशें उँड़ेल दो
मेरे अन्धेरे, भय और पुरानेपन पर ।

उन सभी धाराओं को सलाम जो पहाड़ी से नीचे मैदान तक बहती हैं !

मैं बीच में खड़ा हूँ, और मेरे दोनों तरफ़
बह रहे हैं दिन-रात, बह रही हैं सड़कें और घर ।
मैं जंगहीन लंगर से पैना हूँ, मैं जोशीला हूँ आकाश से भी ज़्यादा ।
मैं मौसमों को घुमाता हूँ लट्टू की तरह ।
अपनी उँगलियों की एक थिरकन से मैं अकेलेपन को दूर भगाता हूँ ।
मैं ख़ुद अपना दूध पीकर अमर हो जाता हूँ ।

धरती पर ही उगती है घास, पेड़, और भीगा हुआ आने वाला कल ।

अँग्रेज़ी से अनुवाद : अनिल जनविजय

लीजिए, अब यही कविता अँग्रेज़ी में पढ़िए
                 Oktay Rifat
          I Hoisted all my flags

I hoisted all my flags on the flagpoles,
I painted the city with my blood's hot colour.
I spread stones on the road that led to anger.
I levelled towers with the back of my hand.
I quartered love into east, west, north and south,
For the leaps from corner to corner.

My first grasshopper, key to my lock.

Fresh as spring sunshine, burgeoning hopes
That carry my joy on the branch.
Inside the light a different light,
Inside the fruit another seed
Empty all my taps, pour my rain
On darkness and fear and the old.

Hello to the torrents that flood down the hill to the plain!

I stand in the middle; days and nights,
Streets and houses, flow past me on both sides.
I am keener than a rust-free anchor, than the sky.
I spin tbe seasons like a top.
In one snap of the fingers I overturned loneliness, erased it.
Fed on my own milk I grow into immortality.

Grass on the earth, and trees, and wet tomorrows.

Translated by. Ruth Christie